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अलग भोजपुरी राज्य का गठन क्यों नहीं हो सकता????


बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनेताओं द्वारा समय-समय पर भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग उठायी जाती रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने आज तक इस संबंध में सिर्फ कोरी बयानबाजी ही की है। आखिर क्या बात है कि 33 करोड़ लोगों के बीच बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा को अभी तक संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जा सका, जबकि भोजपुरी अब किसी प्रांत की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि यह अपने देश की सीमा से पार आधा दर्जन देशों में बोली जाने वाली भाषा बन गई है। भोजपुरी अब सिर्फ भाषा ही नहीं बरन यह संस्कृति और सभ्यता भी बन गई है। आज हम यहां यह चर्चा इसलिए कर रहे है कि आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना राज्य बनाने की बात की जा रही है, तो फिर बिहार और उत्तर प्रदेश के 22 जिलों को लेकर अलग भोजपुरी राज्य का गठन क्यों नहीं हो सकता। हम सभी भोजपुरी भाषी लोगों से अपील कर रहे है कि भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने और अलग भोजपुरी राज्य के गठन की मांग पर आवाज उठाये। जय हिंद, जय भोजपुर

3 comments:

अजय कुमार झा said...

सवाल ये नहीं होना चाहिए कि नया राज्य क्यों नहीं बन सकता ..वो तो मान लीजीये कि देर सवेर बन भी जाएगा ...सवाल ये है कि आखिर इससे आप कौन से उद्देश्य पूरे कर सकते हैं ....आखिर लक्ष्य भी तो होना चाहिए कुछ और यदि है तो उसे ही सामने रख के लडाई लडी जानी चाहिए

अजेय said...

कमाल करते हैं जनाब आप भी, नये राज्य मे नये नये नेताओ को 'जॉब' नहीं मिलेगा क्या? आज देश का सब से बड़ा उद्देश्य है रोज़गार का सृजन...

loha singh said...

ता अन्दोलंवा आधा दर्जन देशन में चलावे के नू पडी