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क्या तो प्याला क्या तो इसके जाम

भइया प्याले पर(pyala.blogspot.com) इन दिनों चर्चा गर्म है शराब और धर्म के मेलजोल को लेकर। शराबियों को धर्म नहीं पसंद और धर्म को शराब। इसी वजह से हो रही है बहस बेहिसाब... मै कहना चाहुंगा उन लोगों से जो ये इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं ...उन लोगों को बता दूं कि प्याले पर मदिरा की चर्चा न हो तो कहां हो। मयखानों में शराब न हो तो मयखाना किसे कह पायेंगे। रही बात धर्म की तो बेकार की चर्चा है यार। धर्म तो बहुत कुछ कहता है कहां तक उसका पालन हर कोई करता है। धर्म की शुरुआत हुए लाखों साल माफ करियेगा हजारो साल अरे माफ करिये कुछ सैकडों साल ही हुए हैं तो उस पर बहस क्या करनी यार। शराब पर चर्चा करना सही है धर्म पर चर्चा करना गलत भी नहीं... पर कम से कम दोनों की चर्चा एक साथ मत करो यार। क्योंकि किसी भी शराब पीने वाले से पूछ लो वो यही कहेगा कि पीते वक्त टेंशन मत लो बस पीयो ....क्योंकि कोई ग़म भुलाने को पीता है कोई खुशी मनाने को पीता है। खुशी और ग़म धर्म से थोड़े ही आते है यार। मस्त रहो धर्म भूलो और मौज लो। जंगलों में रहते थे दिक्कत हुई पेड़ काटकर घर बना लिये धर्म ने कहा था क्या। जनसंख्या बढ़ाते जा रहे हैं धर्म में लिखा है क्या। चुपके से रात मे टीवी पर मल्लिका के गाने देखते है पर सुबह बच्चों के सामने चैनल बदलते हैं औऱ समझाते भी हैं कि बेटा धर्म कहता है कि पराई स्त्री को मत देखो उसमे मां, बहन या पुत्री का रुप देखों। किसने कहा शिक्षा देने को । ये सब बातें सुनकर कई लोगों को मिर्ची तो ज़रुर लगी होगी। अब भईया धर्म तो बहुत कुछ कहता है कहां तक निभाते है लोग। जो निभाते है उनसे कोई नहीं निभाता।

3 comments:

nishant said...

एकदम दुरुस्त...



http://aapaskibaat-nishant.blogspot.com/

sanjaygrover said...

thik likha.

मौ.तारिक said...

सही बात है यार शराब से चिढ़ है लोगों को नर्क में जाएंगे