मैथिली जी, क्‍या भड़ास को बैन किया जा सकता है?

जब नारद ने बजार पर बैन लगाया था, तो प्रतिरोध की सबसे ऊंची आवाज़ मोहल्‍ला ने बुलंद की थी। प्रतिबंध हमेशा डरी हुई सत्ता का हथियार रहा है। इसलिए इस वक्‍त जब मैं आपसे भड़ास को प्रतिबंधित करने का अनुरोध कर रहा हूं, तो मुझे मालूम है कि हमारी तरफ कितनी तलवारें तनेंगी। एक वक्‍त था, जब मैंने भड़ास की वकालत की थी। आज भी मुझे लगता है कि अभिजात को आईना दिखाने वाली भाषा जनता के बीच ज्‍यादा जगह बनाएगी। लेकिन जब ये भाषा किसी ऐसी महिला को निशाना बनाती है, जो पारंपरिक मूल्‍यों के खिलाफ आधुनिक चेतना की खोज में लगी है, तो हमें ऐसी उच्‍छृंखल भाषा से दूरी बरतने की कोशिश करनी चाहिए।

मनीषा पांडे ने चोखेर बाली पर लिखा कि हम लड़कियां पतनशील होना चाहती हैं। साथ ही पतनशील संदर्भों की सामाजिक व्‍याख्‍या भी करने की कोशिश की, पतनशीलता क्‍या कोई मूल्‍य है। इस पर भड़ास के संचालक यशवंत नामधारी सज्‍जन ने, जिन्‍हें थोड़े दिनों पहले तक सुजाता नामधारी सज्‍जना ने चोखेर बाली का सम्‍मानित सदस्‍य बनाया हुआ था, लिखा कि सिर्फ और सिर्फ पतन, कोई मूल्‍य वूल्‍य की शर्त न थोपो। मनीषा ने भी करारा जवाब दिया, पतनशील स्‍वीकारोक्ति क्‍या कोई भड़ासी भोंपू है? इसके बाद सुजाता को चोखेर बाली से यशवंत की सदस्‍यता खारिज करनी पड़ी।

लेकिन असल खेल इसके बाद शुरू होता है। मनीषा का आरोप है कि यशवंत ने उनके नाम से एक बेनाम शख्‍सीयत ईजाद करके भड़ास पर ऊल-जलूल पोस्‍ट डालनी शुरू कर दी है। इसका एक उदाहरण यहां देखा जा सकता है - भड़ासी डिक्‍शनरी (ये एक पोस्‍ट भड़ास पर प्रतिबंध लगाने के लिए काफी है)। मनीषा का कहना है कि उसे एक औरत होने की सजा दी जा रही है। प्रस्‍तुत है, चैट पर मनीषा से हुई वार्ता का एक अंश।

Manisha: देखा...
me: देख रहा हूं... आप एक पत्र मेरे नाम लिख कर भेजें, जिसमें आपका गुस्‍सा जाहिर होता हो...
Manisha: अविनाश, मुझे अपने ही नाम से लिखना होता और अपने मुंह से अपना गुस्‍सा जाहिर करना होता तो मैं अपने ब्‍लॉग पर ही न लिख देती
me: (chokher bali ka URL kya hai) तो फिर दूसरे से ये अपेक्षा क्‍यों, जो इस संदर्भ से अब तक दूर ही रहा है।
Manisha: (www.sandoftheeye.blogspot.com) अगर तुम्‍हें इसके खिलाफ कुछ बोलने या करने की जरूरत नहीं महसूस हो रही है तो मत करो... फिर मैं देखूंगी कि मुझे क्‍या करना है।
me: जरूरत तभी महसूस होगी, जब मैं कन्विंस होऊंगा।
Manisha: उसे इस बात का और मौका नहीं दे सकती कि वो भरे चौराहे मेरी साड़ी उतारे।
me: दो लोगों की लड़ाई ठीक से समझ तो जाऊं।
Manisha: हां, जरूर। मैं तुम्‍हें सारे क्रमवार लिंक भेज दूंगी... और अविनाश ये दो लोगों की लड़ाई का मसला नहीं है
me: भेजो
Manisha: ये कोई निजी लडा़ई नहीं है
me: मैं तो अभी अभी आया हूं गांव से लौट कर।
Manisha: ये एक आदमी द्वारा अपने आदमी होने का लाभ उठाते हुए भरे चौराहे अपनी पैंट उतारकर खड़े हो जाना है। जिस लड़की को शर्म आएगी खुद ही कुएं में डूब मरेगी।
अगर मनीषा यशवंत के कृत्‍य (?) से खुद को अपमानित महसूस कर रही हैं, तो ये वाकई मुश्किल घड़ी है। हम तमाम ब्‍लॉगरों के लिए, जो समाज की बहुरंगी छवियों, विविध विचारधाराओं के साथ हिंदी ब्‍लॉगिंग को देखना चाहते हैं, भड़ास पर प्रतिबंध को लेकर संशय स्‍वाभाविक है। मैं यशवंत से आग्रह करना चाहता हूं कि या तो वे हिज हाइनेस मनीषा की सदस्‍यता भड़ास से ख़त्‍म करें और उनके तमाम पोस्‍ट्स‍‍ डिलीट करें या फिर हमारी असहमति, हमारे प्रतिरोध के लिए तैयार रहें।

33 कमेंट्स:

इरफ़ान said...
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इरफ़ान said...
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काकेश said...
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masijeevi said...

अविनाश,
आप जानते हैं कि इस प्रकरण में बिलकुल आरंभ में ही यशवंत को ब्‍लॉग पर लिखकर अनुरोध किया था। उसके बाद भड़ास वालों ने जितनी गालियॉं मनीषा को दी हैं ठीक उतनी ही हमें भी दी हैं बाकायदा पोस्‍ट के शीर्षक में लिखकर जैसे यहॉं1, यहॉं2, यहॉं3, यहॉं4
कमेंट में लिंक लगाने में दिक्‍कत होती हे इसलिए और गिना नही रहा हूँ।
इसके बावजूद मेरा कहना है कि बैन की बात न की जाए। मनीषा को, चोखेरबाली को और उनके सरोकारों को हमारा समर्थन है किंतु जो संघर्ष सत्‍ता के कंधे पर चढ़कर लड़े जाते हैं वे जल्‍द ही एप्रोप्रियेट कर लिए जाते हैं
दूसरे मुनव्‍वर या 'मनीषा हिजड़े' के वास्‍तव में होने न होने की हमारी आश्‍ांकाएं एक ओर पर उनसे प्रमाण मांगने जैसी रवायते एकदम गैर ब्‍लॉगिंग लाइक हैं।
हॉं फ्लैग करना एकदम जायज अधिकार है किसी भी पाठक का उसे बिल्‍कुल इस्‍तेमाल करें पर मैथिलीजी से अनुरोध है कि बैन आदि के कदम से बचने का प्रयास करें

वैसे समय कैसे बदलता है, आज अविनाश बैन की वकालत कर रहे हैं, और नारद से नहीं ये मैथिलीजी से किया जा रहा और नारद पर तो अब बैन करने की सुविधा ही हट गई है..

महामंत्री (तस्लीम ) said...

भई मेरी समझ से ये बैन वाला कान्सेप्ट सही नहीं है। क्योंकि सबको अपनी राय रखने का हक है। हाँ अगर कोई गलत कर रहा है, तो आप उसे उसके हाल पर छोड दें, उसे उसके "कर्मों" की सजा एक दिन खुद ब खुद मिल जाएगी।

Anonymous said...

Itihas se Maithili uvach :)
मैं बाजार पर अवैध अतिक्रमण के लिखे का विरोध करता हूं. इस का विरोध में उनके चिठ्ठे पर भी कर चुका हूं...पर क्या हम एक सैंसरशिप नहीं थोपने जारहे हैं? कल को और भी छोटी छोटी बातें होंगी.
मैं तो इस कदम का विरोध करता हूं


Itihaas se Avinash Uvach :)
संयत भाषा के क्‍या मानक हैं? ...एग्रीगेटर के माध्‍यम से आप सभी पक्षों के नरम और उग्र वक्‍तव्‍यों को आने-जाने दीजिए, रोकिए मत। और आप किसी के ब्‍लॉग को खर-पतवार कैसे कह सकते हैं- ये कौन-सी भाषा है?...प्रतिबंध लगाने का हक़ आपको नहीं है।...जो उन्‍हें बुरा लगेगा, वे खुद ही उसका विरोध करेंगे। नहीं जाएंगे उनके चिट्ठे पर।

Vakt kya kya rang dikhata hei ;)

सुजाता said...

अविनाश आपका मुझ पर कटाक्ष समझ रही हूँ , इस बारे मे मेरी मनीषा से तभी बात हुई थी, मै इस पर पोस्ट लिखना चाह्ती थी लेकिन फिर हमारी राय बनी थी कि हम यशवंत को और भडास को पूरी तरह इगनोर करें । शायद आपसे मनीषा ने यह कहा इसकी यही वजह है ।

इन बातों को जाने दिया गया है ऐसा नही है इन बातों पर अब भी मंथन जारी है ।

' said...

मैं इरफान जी के तरीके से सहमत हूँ. आपकी पोस्ट आज के परिपेक्ष्य मे विचारणीय है पर साथ मे निवेदन है की हिन्दी भाषा के प्रचार प्रसार हेतु आप अपनी पोस्ट हिन्दी मे प्रकाशित करे धन्यवाद

अजित वडनेरकर said...
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अनुनाद सिंह said...

मुझे तो इसमें 'मियाँ की जूती मियाँ के सिर' वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है।

पूर्व में जो लोग गन्दगी को महिमामंडित कर रहे थे वे ही आज उसके शिकार हो गये हैं। इससे उनका दोगलापन उजागर हुआ है। गाली जब दूसरों को दी जाय तो अच्छी है; जब अपने को गाली मिले तो बुरी है।

जय हो...

मनीषा पांडेय said...

अविनाश, तुम्‍हें हमारे बीच चैट पर हुई बातचीत को इस तरह से सार्वजनिक करने का अधिकार तुम्‍हें किसने दिया। यह बहुत गलत और गैर-लोकतांत्रिक तरीका है। अगर भड़ासी गतिविधि तुम्‍हें गलत और अनैतिक ल्रगती है, तो उसका खिलाफ ठोस तरीके से जो हो सके, वो करो। न करना चाहो तो न करो। लेकिन हमारे बीच हुई एक बातचीत, जो कल मैंने बहुत क्रोध और क्षोभ की स्थिति में की थी, उसका इस तरह से इस्‍तेमाल करके तुम एक तरह से मुझे ही अपमानित कर रहे हो। हमारी पुरानी जान-पहचान और कुछ समान वैचारिक पक्षधरता के चलते मैंने अपना गुस्‍सा तुम्‍हारे साथ चैट पर जाहिर किया। अविनाश, यशवंत और उसकी भडा़सी टीम के प्रति मेरे मन में जितना गुस्‍सा है, इस बात से उससे कहीं ज्‍यादा है। इसे तुरंत यहां से हटाओ।

kewal sach said...

http://maeriiawaaj.blogspot.com/2008/02/blog-post_24.html

मनीषा पांडेय said...

तुमने लिखा, मैं शुक्रगुजार हूं, लेकिन चैट वाले हिस्‍से को वहां से हटाओ।

masijeevi said...
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Neelima said...

भडास का पतन अफसोसजनक है !मनीषा के साथ वैचारिक भिडंत में यथवंत जी के मंच पर मनीषा नाम के किन्नर का उदय सचमुच नाटकीय है ! इससे भी ज्यादा नाटकीय है इस नए किन्नर महाशय को ब्लॉग जगत की सारी उथल पुथल और ब्लॉगर बंधुओं से वाकफियत होना ! मसिजीवी और मेरे परिवार के लिए हिजडों और गैरहिज़डों से कहलवाए गए अपशब्द बेहद शर्मनाक और निंदनीय है !यश्वंत जी के साथ पूरी सहानुभूति और उनके साथ जुडे तमाम हिजडों ,अहिजडों की पातालगामी विमर्शशीलता को दूर से नमन ! यशवंत गैरयशवंत सभी भडासी ,भडास निकाल कर विरेचनावस्था को प्राप्त करें अभी भी इसी कामना के साथ
नीलिमा

Anonymous said...

Why you guys are trying to become a cyber police here... I have not seen the Bhadas stuff, but if anyone has problem just ignore it...

Cyber space is all about freedom, it depends upon us how we use it...

BUT PLEASE FOR GODSAKE... DONT TRY TO BE CYBER OR MORAL POLICE...

kal ko kisi ko Mohalla ganda lagega wo ise flag karne lag jaayega.... Kisi ko Dilip Mandal se problem hogi to wo is blog par ban ki demand karega...

LET IT BE FREE SPACE...

अजित वडनेरकर said...

हालिया मसला तो गंभीर है ही। हम मनीषा के साथ हैं उस पोस्ट से ही जिस पर से बवाल शुरू हुआ। भड़ास के उद्धेश्य को लेकर मै शुरु से सशंकित था, और वही हुआ । पाखंड और छिछलापन दिखाने का खुला आमंत्रण भड़ास के नाम पर । गोया इस देश के नौजवान साइबेरिया के कंसेन्ट्रेशन कैंप में रह रहे हैं। उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी भी नहीं है। कमाल है।
अजीब तब लगा जब पढे लिखे लोगों ने इस प्रवृत्ति को यूं सराहा मानो क्रांति हो गई है। क्या नया विचार दे दिया है भड़ास ने बीते अर्से में। ये तारीफ करने वालों को भी सोचना चाहिये था कि परख किसकी कर रहे हैं । चलते रास्ते पिच्च से कहीं भी थूकने ,चलते रास्ते गालियां बकने, राह चलती औरतों को घूरने, उनसे रिश्तेदारी की बातें सोचने , उन्हें बेइज्जत करते वक्त अपनी माँ बहनों को भूलने और बेशर्मी के साथ इतराने वाले हर गली, मोहल्ले, चौराहे पर मिलने वाले हिन्दुस्तानियों को क्या सचमुच किसी भड़ास जैसे मंच की ज़रूरत थी ?

Anonymous said...

ये ही यशवं‍त सिंह स्‍टार न्‍यूज के सीनियर पत्रकार विनोद कापड़ी से भिड़ गए और उल्‍टा पुल्‍टा कहा था जिसने इनकी बात टेप कर जागरण अखबार के मालिकों को सुना दी जिसकी वजह से यशवंत को वहां से रवाना कर दिया गया। यह बात यशवंत जी जगजाहिर क्‍यों नहीं करते कि वे अपनी वाणी के साथ साथ दिमाग में भी कूडा रखते हैं।

Debashish said...

अविनाश आपका अबाऊट टर्न अच्छा लगा पर यह रवैया पहले से रखने से कोई हर्ज नही था :) काश यह समझ आप नारद के समय खामख्वाह का विरोध करते समय भी रखते, केवल मुहल्ला की सनसनीखेज नींव रखना ही उद्देश्य न रखते ;)

आपको टिप्पणीयाँ और व्यक्तिगत बातचीत को बिना अनुमति और बिना संदर्भ प्रस्तुत करने की आदत से भी बचना चाहिये। टिप्पणी और IM की बातचीत पर आपका प्रकाशन हक नहीं बनता, खास तौर पर बिना अनुमती यह करना। टिप्पणी पोस्ट से हटा कर देखी जाय तो उसका सही अर्थ ही निकल ज़रूरी नहीं है।

मेरा अब भी यही मत है कि एग्रीगेटर पर बैन करने की तुक नहीं है। हर जगह इसे Flag ही करना चाहिये, जैसे ब्लॉगर पर किया। ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत तो फ्लैग्ड चिट्ठे अलग रंग या प्रमुखता से दर्शाने चाहिये। फ्लैग्ड पोस्ट को जो पढ़ना चाहे पढ़े। और सही तरीका है कि अपनी ब्लॉग पोस्ट और टिप्पणियों से विरोध जतायें।

Jitendra Chaudhary said...

(अविनाश ये पोस्ट हटाना नही, कोशिश करना कि बाजार के समर्थन वाली पोस्ट भी साथ लगा दो, तब ज्यादा अच्छा दिखेग।)

मुझे तो लगता है जो तरीका मोहल्ला ने (विवाद खड़ा करके) अपनाया था उसी परम्परा को निभाते हुए, भड़ास ने भी अपनी हिट्स बढाने की कोशिश की। अच्छा है, भस्मासुर पैदा करो और अब उनसे बचते फिरो, अनंतकाल से यही होता आया है। आगे भी होता रहेगा।

बाकी कुछ हो ना हो, इससे मोहल्ले/अविनाश का दोगलापन तो साबित हो ही गया। गाली अगर दी जाए तो उचित है, अगर कोई दूसरा आपको दे तो अनुचित।बहुत अच्छे,अविनाश सही जा रहे हो। शायद अब तुमको पता चले, कि गन्दगी, गन्दगी ही होती है, उसमे अच्छे तत्व नही ढूंढे जाते।

एक बात साफ़ कर दूं, मै ना तो भड़ास का समर्थन करता हूँ और ना मोहल्ले का। बतौर दर्शक मेरी निजी राय है। मै आज भी यही कहता हूँ, ब्लॉग विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम है, मानसिक गंदगी परोसने का नही।

Anonymous said...

ये यशवंत ि‍संह को लात मारकर दैनिक जागरण से निकाला गया था। दैनिक जागरण के सीनियर मैनेजमेंट के लोगों ने ऐसा किया था और 10-12 साल पत्रकारिता करने के बाद अब ये आदमी किसी मोबाइल कंपनी में काम करता है। क्‍योंकि पत्रकारिता से इसे जूता मारकर निकाल दिया गया। विनोद कापड़ी को इस आदमी ने दारू पीकर गाली-गलौज की थी और खूब गंदी-गंदी बातें बोली थीं। उन्‍होंने ये बातें जागरण के मैनेजमेंट के लोगों को सुना दीं और ये तुरंत वहां से खदेड़े गए। ये पत्रकार की औलाद उस पर कुछ क्‍यूं नहीं बोलते हैं। यहां ब्‍लॉग पर अपने दिमाग का कूड़ा निकाल रहे हैं। ये आदमी एक गंदा दिमाग और गंदा चरित्र रखता है। दैनिक जागरण से जूता मारकर निकाले जाने की घटना की बात आते ही पैंट में मूतने लगते हैं।

Anonymous said...

भड़ास के इस्तेमाल की धमकी देकर यशवंत ने कापड़ी को बदनाम करने की बात भी कही थी और उसे जागरण से केवल निकाला नहीं गया था, जिस हद तक जलील किया गया उससे किसी भी स्वाभिमानी आदमी के लिए खुदकुशी करने की ही नौबत आ जानी चाहिए। वहां तीन बजे रात में इस आदमी ने सभी लोगों की मौजूदगी में लोगों के पैर पकड़ कर रिरिया कर माफी मांगी थी और अपना ब्लॉग भड़ास डिलीट किया था। लेकिन उल्टियां करने की आदत नहीं गई और फिर से भड़ास बन गया। आपलोग क्या समझते हैं, इतना जलील होने के बाद कोई आदमी सामान्य और सभ्य आदमी के रूप में व्यवहार करेगा? अभी उसकी निजी जिंदगी के कई पहलू ऐसे हैं, जो अगर सामने आए तो पता नहीं क्या हो जाए। कोई उनकी पत्नी से संपर्क करे, वह उसकी असलियत बताएगी और उसकी उल्टियों के राज सामने आएंगे।

आशीष said...

जिस बात का दुख था वही हो रहा है। हम ब्‍लॉगरों के लिए इससे शर्म की क्‍या बात होगी कि हम आपस में लड़ रहे हैं। जहां बहस होनी चाहिए थी वहां एक दूसरे के व्‍यक्तिगत जीवन को खोलकर सामने लाया जा रहा है। बहुत शर्मनाक स्थिति है हम सब ब्‍लॉगरों के लिए । अविनाश जी आपसे निवेदन है कि बेनामी कमेंट को मोहल्‍ले पर स्‍थान न दें।

Ashish maharishi
http://bolhalla.blogspot.com

Anonymous said...

क्‍यों गुरु यशवंत, जैसे दैनिक जागरण से लात मारकर निकाले गए, वैसे ही चोखेरबाली से भी लतियाकर-धकियाकर निकाल दिए गए। हमको तो दुइए जगह लतियाए जाने की जानकारी प्रज्ञपत हुआ है। और कहां कहां से लतियाए गए हो गुरु, तनि हमें भी बताओ।

Anonymous said...

Kyon pyare, Bazar ka Rahul gaali de to wo gaali nahi. Kyon uski gali khane wale log sabhya,pratishthit nahi? Aur Bhadas kisi ko kuchh kahe to pratibandhit kar do. Hindustani hypocracy to saamne aayegi hi. Isiliye Hindi bolne wale chutiye rahe hain aur rahenge

अंकित माथुर said...

From the past one month or so I have been a silent spectator of the cold war which is happening in the hindi blogosphere? People are fighting it out hard with a volley of words with each other. One thing is for sure, no one is concerned about what he or she wants to achieve as an objective out of Independent blogging, rather they are concerned about what other people are doing or saying in their space?

I dont understand one thing, instead of staying focussed on what one wants to do, why are people getting distracted by things which should hardly matter to any one? Its a free world, any one is free to write anything? Usage of foul language is certainly something which one cant be appreciative of, but still there might be certain times where without venting out your ire in the form of abusive language you might not get the kind of satisfction that you want to achieve. I am not trying to be the devils advocate and start a new controversy but I am also not in complete favour of use of abuses. In the past there have been certain debates which are going no where? I have not been able to understand why this cold war is going on? On popularity charts if Bhadas supercedes any other personal or a group blog it shouldnt bother any one. We as people should rather concentrate on achieving the objectives of our own satisfaction out of blogging? These baseless or I should say needless controversies will not lead any of us any where? At the end of the day if one blog is closed there are loads of other ways? It might take people to get over with the jolt but sooner or later they might come back and this time may be with more vengeance. Who knows? Lately I have been my self very disappointed, and it kind of demotivated me to write anything.This is an illusionistic space why are we spoiling our own self by getting involved in these things. Are there lesser things to focus on? NO.Guys its time to grow up and think constructively. Dont get distracted by what ppl have to say about anyone. I certainly dont want to be a part of any controversy, it was just some thoughts which suddenly sparked off and i posted it "With Malice towards None and All"
Just do it? And be cool.

Ankit

अनूप शुक्ल said...

अभद्र भाषा जो प्रयोग की गयी मनीषा पांडे के लिये उसकी मैं घोर निंदा करता हूं। उससे ज्यादा निंदा इस बात की कि मनीषा के एतराज के बावजूद अभी तक अपने और उनके बीच हुयी चैट को आप मोहल्ले में सजाये हुये हैं।

हाशिए पर खड़ा एक दर्शक said...

भड़ास जैसे ब्लॉगर्स जिस घटियापन पर उतर आएं हैं उसका जितना भी प्रतिरोध किया जाए कम होगा... सभी एकजुट होकर भड़ास की भड़ास को साफ करें...आखिर ये हम सभी की जिम्मेवारी है कि हमें कैसी हवा में सांस लेना है...

अविनाश said...

मसिजीवी, देबाशीष और जीतेंद्र चौधरी, आपने शायद मेरी पोस्‍ट ठीक से पढ़ी नहीं। मैं अभी भी बजार पर अवैध अतिक्रमण पर प्रतिबंध के ख़‍िलाफ़ हूं। भड़ास को भी प्रतिबंधित करने के पक्ष में नहीं हूं। ऐसा होता तो, मेरे पास दलीलें होतीं। जबकि मेरे पास कोई दलील नहीं है। एक कमज़ोर आदमी का क्षोभ जिस तरह व्‍यक्‍त हो सकता है, वो हुआ है। चैट हटाने न हटाने के संदर्भ में इसके बाद वाली पोस्‍ट में टिप्‍पणी की है।

Anonymous said...

jio raja avinash j, dlinhi bs jid kr rhe ho ki bhadas ko prtibndhit kiya jay, tum kitne pyare bchchha ho raja..lge rho aage jaoge...

Anonymous said...

dlil nhi bs jid hai tumhari pyare...bde masum ho bde bhole ho...tbhi to mhilaon ke rajdar ho..jhandabrdar ho...jio raja avinsh...sdka java...

ramesh said...

maneesha jee se pooche bina aapko unse huai bat chit ko prakashit nahi krna chahiye tha. aap ko maneesha se sarwjanik maphi mabgte hue use tatkal dilit kar dena chahiye

जय राम जी की said...

जनाब कम से कम इतना तो बता दें कि इस जंग में कौन जीता और कौन हारा। कहीं यह सब आप लोगों की मिली भगत तो नहीं थी। वैसे आप और मनीषा के मूल चरित्र में कोई खास अंतर नहीं है। जय राम जी की

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