चे के साथ मोटरसाइकिल पर सफ़र
इन दिनों चे पर मन रीझा हुआ है। हमारे जैसे हर उस नौजवान को ऊर्जा मिल रही है, जो पुराने ताक़तवर संदर्भों के सामने आने पर उत्साहित हो जाते हैं। आज अव्यक्त शशि ने गूगल चैट का दरवाज़ा खटखटाया और अपने मन का हाल बयान किया। हमने बात थोड़ा आगे बढ़ाने की कोशिश की- बात बढ़ी- और हम यहां उसे सार्वजनिक कर रहे हैं। वजह साफ है कि बातचीत में निजी जैसा कुछ नहीं है- और ये सामूहिक बातचीत का ही एक छोटा-सा हिस्सा है। अगर आपको लगता हो कि बात आगे बढ़ सकती है- और चे से जुड़े अपने ज़िंदगीनामे को भी शेयर करना चाहते हों, तो मोहल्ले की गलियां आपको पुकार रही है।
अव्यक्त: अविनाश भाई नमस्कार! थानवी जी का लिखा यात्रा वृत्तांत पढ़ रहा हूं। दिलचस्प है।
अविनाश: वाह। ज़रूर पढ़िए। चे पर कुछ लिखना चाहें, तो वो भी लिखिए।
अव्यक्त: हमारी पीढ़ी पर भी चे का बहुत प्रभाव रहा। हालांकि उसमें रोमांटिसिज़्म का पुट ज़्यादा था। मेरा मतलब है चे की सैद्धांतिकियों की बजाए, उनके पोस्टरों, टीशर्ट पर छपी उनकी तस्वीरों के सहारे ही ज़्यादा छाये चे। अधिक से अधिक उस स्पानी नारे तक ही पहुंच पाये ज़्यादातर लोग। हाथों में लाल झंडा थामे यूनिवर्सिटी की सड़कों पर एक जुनूनी अंदाज़ में चिल्लाते थे- अल्पाब्लो यूनीडो जामेस्सेरा वेन सीडो (दी पीपुल, युनाइटेड शैल ऑलवेज़ बी विक्टोरियस)...
अविनाश: लेकिन इसमें आपकी अपनी पीढ़ी का संदर्भ साफ करना होगा...
अव्यक्त: नब्बे के दशक का वाम छात्र आंदोलन। जिन्होंने साठ के आखिरी दशक और सत्तर के दशक के प्रचंड वाम लहर को अखबारी आलेखों या अपने सीनियर काडरों से सुनी कहानियों के ज़रिये ही जाना था। यहां तक कि नारे तक हमने उधार ही लिये थे। जिस दौर में साम्राज्यवाद का नव उदारवादी नया दानव इस व्यवस्था में अपनी पैठ बना रहा था- हम कैरियरिज़्म की चपेट में आ चुके थे। हां, चुनावी लोकप्रियता के हिसाब से हमने संप्रयादवाद को ज़रूर अपना नंबर वन शत्रु माना था। चे गुवेरा, हो ची मिन्ह... वी शैल फाईट वी शैल विन की जगह अयोध्या के दंगाइयों को एक धक्का और दो और देश से किसने की गद्दारी, निक्करधारी अटल बिहारी जैसे नारों ने ले लिया। पूरा का पूरा वाम छात्र आंदोलन एक भटकाव के दौर से गुजर रहा था। नई चुनौतियां, नये दबाव और एक नये ताकतवर राज्य के आगे एक असहाय आंदोलन।
अविनाश: वक्त हो, तो आप इसको और विस्तार दीजिए। चे गेवारा के साथ कुछ दूर तक का सफ़र हो जाए। मतलब हमारे और हम जैसों के जीवन में चे गेवारा की मौजूदगी पर कुछ लिख डालिए।
अव्यक्त: पिछली बार उनकी मोटरसाइकिल पर सवार होकर की थी ये यात्रा। मेरा मतलब है लेडी श्रीराम कॉलेज में एक फिल्म फेस्टिवल में कुछ महिला कॉमरेड मित्रों ने दी मोटरसाइकिल डायरीज़ देखने के लिए बहुत ज़िद की। बहुत कुछ अच्छा था इस फिल्म में। कुछ को चे के गरियाने के अंदाज पर ऐतराज था। कुछ को इसमें एक स्वाभाविकता भी जान पड़ी। लेकिन एक एकीकृत लैटिन अमेरिका का चे का स्वप्न... एक भावी समाज की उनकी दृष्टि, एक महामानव की मानवीय वृत्तियां सब कुछ बहुत रोमांचकारी था।
अविनाश: इस बातचीत को मोहल्ले पर पब्लिश कर दूं?
अव्यक्त: कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं। कुछ ऑर्गेनाइज्ड भी तो नहीं है। पासिंग स्टेटमेंट्स के लिए वैसे ही हमारी पीढ़ी बहुत बदनाम है। आगे आपकी मर्जी है। आप उचित या डालने लायक समझें तो डाल दें।








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